सायद आप समझ पाएं -
जब हम एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश में जाते हैं तो हम उसे अपना नहीं पाते और कोशिश रहती है कि अपने प्रदेश में जल्दी से जल्दी पहुँच जाये ! तो फिर कैसे एक विदेशी हमारे ऊपर दस साल राज कर लेती है और हम समझते हैं कि उसने हमारे देश को पूणतः अपना लिया होगा ! बड़ी गलत फैमियों में जी रहे हैं हम जनाब ! एक विदेशी हम पर दस साल राज कर लेती है और हम करने देते हैं ! माना की उसने कोई पद नहीं लिया पर सर्वे सर्वा तो वही थी और आज भी वही है ! इसमें हमारी काबिलियत नहीं बल्कि उसका टैलेंट नज़र आता है ! सायद इसीलिए अमेरिका ने सख्त कानून बनाया है कि अमेरिका का राष्ट्रपति वही बन सकता है जिसने अमेरिका में जन्म लिया हो ! हो सकता है अमेरिका मुर्ख है ! कभी कभी हमें अपनी बुद्धिमानी और काबिलियत पे संका सी होती है !
गुलाम हम तब भी थे और आज भी हैं ! फर्क बस इतना है की आज हम संकीर्ण मानसिकता, जातिवाद और कई ऐसे माईनो में खुद अपने ही गुलाम हैं ! सोचने वाली बात है जनाब !!
गुलाम हम तब भी थे और आज भी हैं ! फर्क बस इतना है की आज हम संकीर्ण मानसिकता, जातिवाद और कई ऐसे माईनो में खुद अपने ही गुलाम हैं ! सोचने वाली बात है जनाब !!
~सुमित कुमार द्विवेदी
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