क्रांति
- जरुरत आज की !!
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| क्रांति |
अब एक ख्वाब सीने में जग जाने दो,
देर से ही सही, पर कुछ बदलेगा जरूर,
कोशिशे इतनी करो कि पानी में भी आग लग जाने दो !!
क्या मिलेगा हमें जो हम बैठे रहेंगे तन्हाइयों में,
क्रांति का शोला इस दिल में अब भड़क जाने दो !
अब एक ख्वाब सीने में ……
धीमे-धीमे ही सही , सांसें चलेंगी कैफ़ियत की जरूर,
इस देश से रावण का राज अब बिलम् जाने दो !
अब एक ख्वाब सीने में ……
भरा बैठा हूँ देखो में तो,
अब जरा तुम भी भर जाओ !
खात्मा होगा दुश्मन का एक दिन जरूर ,
भरी महफ़िल में एक बगावत की आवाज़ अब उठ जाने दो !!
अब एक ख्वाब सीने में ……
बेहद मुसीबतें आएंगी रस्ते में , ये हकीकत है !
चोट भी लगेगी, गद्दारियां भी होंगी,
मेरी सांसो को बंद करने की तैयारियां भी होंगी,
पर इतना कुछ होने के बाद भी,
मुझे अब सड़क पर उत्तर जाने दो !!
अब एक ख्वाब सीने में ……
मेरे दुश्मनो ! सब्र रक्खो ज़रा ,
मैं भी मर जाऊँगा एक दिन,
पर पहले तेरे रावण को मार कर इस दुनिया में दफ़न कर जाने दो !!
अब एक ख्वाब सीने में जग जाने दो,
देर से ही सही, पर कुछ बदलेगा जरूर,
कोशिशे इतनी करो कि पानी में भी आग लग जाने दो !!
सुमित द्विवेदी
१० जुलाई २०१५ /२५ असाढ़ २०७२
नई दिल्ली

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