क्यों नमकीन है मिज़ाज़ समंदर का, क्या पता है,
तन्हा है,अकेला है, ऊपर उसके घनघोर अंधेरा है,
तन्हा है,अकेला है, ऊपर उसके घनघोर अंधेरा है,
नही रोशनी उसके पास हमारे शहरों की तरह,
नही चमक उसके पास हमारे चेहरों की तरह,
नही चमक उसके पास हमारे चेहरों की तरह,
कितना कुछ ये सेहता है, फिर भी चुप रहता है,
अपने ही आंशुओं को हर पल पानी की तरह ये पीता है,
अश्रुत धारा बनके फिर भी हमारे जीवन मे बहता है,
यही नियति यही उद्देश्य है सायद उसके जीवन का,
अपने ही आंशुओं को हर पल पानी की तरह ये पीता है,
अश्रुत धारा बनके फिर भी हमारे जीवन मे बहता है,
यही नियति यही उद्देश्य है सायद उसके जीवन का,
इसीलिए गमगीन है मिज़ाज़ समुन्दर का,
सायद इसिलए नमकीन है मिज़ाज़ समुन्दर का,
हमारी तकलीफ की तरह !!
सायद इसिलए नमकीन है मिज़ाज़ समुन्दर का,
हमारी तकलीफ की तरह !!
16 May 2017
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