इस थोड़ी सी चांद की रोशनी में, हम दूर तक चलें भी तो कैसे।
तेरे इश्क़ में मैं मोम सा बन के रह गया हूँ, बिन बाती के हम अब जलें भी तो कैसे।
एक तुम ही तो थी अपनी, तुम्हारे बिना हम अब जियें भी तो कैसे।
पर तुम्हे हमसे मोहब्बत भी तो न थी, तो फिर तुम्हे बेवफा हम कहें भी तो कैसे।
तेरे इश्क़ में मैं मोम सा बन के रह गया हूँ, बिन बाती के हम अब जलें भी तो कैसे।
एक तुम ही तो थी अपनी, तुम्हारे बिना हम अब जियें भी तो कैसे।
पर तुम्हे हमसे मोहब्बत भी तो न थी, तो फिर तुम्हे बेवफा हम कहें भी तो कैसे।
Comments
Post a Comment