ये जो मेरे चेहरे की हंसी है,
तेरी मोहोब्बत का सबूत हैं,
और तेरी आँखों में चमक,
है तुझसे इश्क़ करने की इजाज़त ।
अंजाम अंजाम अंजाम,
क्या होगा ?
बूंदों को बादलों से,
छूटने का फ़ितूर है,
पर ज़मीन पे गिरते ही,
उनका वज़ूद नही सलामत ।
अंजाम अंजाम अंजाम ,
कहो तो, आखिर क्या होगा ?
अपना भी फ़लसफ़ा कुछ ऐसा ही है,
इन बूंदो की तरह,
दुनिया से छूट तेरी मोहोब्बत में
पड़ने का जुनून है,
और मोहोब्बत में पड़ते ही,
दुख, बैर और सहादत।
अंजाम अंजाम अंजाम,
बताओ तो, आखिर क्या होगा ?
अब तुम्ही कहो,
अपनी इन चमकती सर्माती पलकों
को झुककर,
क्या अब भी है मुझे,
तुझसे मोहब्बत करने की इजाज़त ?
ये जो मेरे चेहरे की हंसी है,
तेरी मोहोब्बत का सबूत हैं,
और तेरी आँखों में चमक,
है तुझसे इश्क़ करने की इजाज़त ।
सुमित दिवेदी
तेरी मोहोब्बत का सबूत हैं,
और तेरी आँखों में चमक,
है तुझसे इश्क़ करने की इजाज़त ।
अंजाम अंजाम अंजाम,
क्या होगा ?
बूंदों को बादलों से,
छूटने का फ़ितूर है,
पर ज़मीन पे गिरते ही,
उनका वज़ूद नही सलामत ।
अंजाम अंजाम अंजाम ,
कहो तो, आखिर क्या होगा ?
अपना भी फ़लसफ़ा कुछ ऐसा ही है,
इन बूंदो की तरह,
दुनिया से छूट तेरी मोहोब्बत में
पड़ने का जुनून है,
और मोहोब्बत में पड़ते ही,
दुख, बैर और सहादत।
अंजाम अंजाम अंजाम,
बताओ तो, आखिर क्या होगा ?
अब तुम्ही कहो,
अपनी इन चमकती सर्माती पलकों
को झुककर,
क्या अब भी है मुझे,
तुझसे मोहब्बत करने की इजाज़त ?
ये जो मेरे चेहरे की हंसी है,
तेरी मोहोब्बत का सबूत हैं,
और तेरी आँखों में चमक,
है तुझसे इश्क़ करने की इजाज़त ।
सुमित दिवेदी
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